श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.8.2

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

अथाचार्यसुतस्तेषां बुद्धिमेकान्तसंस्थिताम्।

आलक्ष्य भीतस्त्वरितो राज्ञ आवेदयद् यथा॥ २

athācāryasutasteṣāṃ buddhimekāntasaṃsthitām|

ālakṣya bhītastvarito rājña āvedayad yathā|| 2

अर्थ

जब गुरुजीने देखा कि उन सभी विद्यार्थियोंकी बुद्धि एकमात्र भगवान्‌में स्थिर हो रही है, तब वे बहुत घबराये और तुरंत हिरण्यकशिपुके पास जाकर निवेदन किया॥ २॥ ✎ 604

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #604 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्‌में

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