श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.8.15

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

एवं दुरुक्तैर्मुहुरर्दयन्रुषा

सुतं महाभागवतं महासुरः।

खड्गं प्रगृह्योत्पतितो वरासनात्

स्तम्भं तताडातिबलः स्वमुष्टिना॥ १५

evaṃ duruktairmuhurardayanruṣā

sutaṃ mahābhāgavataṃ mahāsuraḥ|

khaḍgaṃ pragṛhyotpatito varāsanāt

stambhaṃ tatāḍātibalaḥ svamuṣṭinā|| 15

अर्थ

इस प्रकार वह अत्यन्त बलवान् महादैत्य भगवान्‌के परम प्रेमी प्रह्लादको बार-बार झिड़कियाँ देता और सताता रहा। जब क्रोधके मारे वह अपनेको रोक न सका, तब हाथमें खड्ग लेकर सिंहासनसे कूद पड़ा और बड़े जोरसे उस खंभेको एक घूँसा मारा॥ १५॥

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