प्रह्लादजीद्वारा माताके गर्भमें प्राप्त हुए नारदजीके उपदेशका वर्णन
नारद उवाच
एवं दैत्यसुतैः पृष्टो महाभागवतोऽसुरः।
उवाच स्मयमानस्तान्स्मरन् मदनुभाषितम्॥ १
evaṃ daityasutaiḥ pṛṣṭo mahābhāgavato'suraḥ|
uvāca smayamānastānsmaran madanubhāṣitam|| 1
अर्थ
नारदजी कहते हैं—युधिष्ठिर! जब दैत्यबालकोंने इस प्रकार प्रश्न किया, तब भगवान्के परम प्रेमी भक्त प्रह्लादजीको मेरी बातका स्मरण हो आया। कुछ मुसकराते हुए उन्होंने उनसे कहा॥ १॥
एवं दैत्यसुतैः पृष्टो महाभागवतोऽसुरः।
उवाच स्मयमानस्तान्स्मरन् मदनुभाषितम्॥ १
नारदजी कहते हैं—युधिष्ठिर! जब दैत्यबालकोंने इस प्रकार प्रश्न किया, तब भगवान्के परम प्रेमी भक्त प्रह्लादजीको मेरी बातका स्मरण हो आया। कुछ मुसकराते हुए उन्होंने उनसे कहा॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.7.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 841) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/7/1/