श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.6.19

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

न ह्यच्युतं प्रीणयतो बह्वायासोऽसुरात्मजाः।

आत्मत्वात् सर्वभूतानां सिद्धत्वादिह सर्वतः॥ १९

na hyacyutaṃ prīṇayato bahvāyāso'surātmajāḥ|

ātmatvāt sarvabhūtānāṃ siddhatvādiha sarvataḥ|| 19

अर्थ

मित्रो! भगवान्‌को प्रसन्‍न करनेके लिये कोई बहुत परिश्रम या प्रयत्न नहीं करना पड़ता। क्योंकि वे समस्त प्राणियोंके आत्मा हैं और सर्वत्र सबकी सत्ताके रूपमें स्वयंसिद्ध वस्तु हैं॥ १९॥✎ 590

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #590 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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