॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.5.35
अयं मे भ्रातृहा सोऽयं हित्वा स्वान् सुहृदोऽधमः।
पितृव्यहन्तुर्यः पादौ विष्णोर्दासवदर्चति॥ ३५
ayaṃ me bhrātṛhā so'yaṃ hitvā svān suhṛdo'dhamaḥ|
pitṛvyahanturyaḥ pādau viṣṇordāsavadarcati|| 35
अर्थ
देखो तो सही—जिसने इसके चाचाको मार डाला, अपने सुहृद्-स्वजनोंको छोड़कर यह नीच दासके समान उसी विष्णुके चरणोंकी पूजा करता है! हो-न-हो, इसके रूपमें मेरे भाईको मारनेवाला विष्णु ही आ गया है॥ ३५॥