श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.5.16

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

आनीयतामरे वेत्रमस्माकमयशस्करः।

कुलाङ्गारस्य दुर्बुद्धेश्‍चतुर्थोऽस्योदितो दमः॥ १६

ānīyatāmare vetramasmākamayaśaskaraḥ|

kulāṅgārasya durbuddheścaturtho'syodito damaḥ|| 16

अर्थ

‘अरे, कोई मेरा बेंत तो लाओ। यह हमारी कीर्तिमें कलंक लगा रहा है। इस दुर्बुद्धि कुलांगारको ठीक करनेके लिये चौथा उपाय दण्ड ही उपयुक्त होगा॥ १६॥

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