॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.4.35
यं साधुगाथासदसि रिपवोऽपि सुरा नृप।
प्रतिमानं प्रकुर्वन्ति किमुतान्ये भवादृशाः॥ ३५
yaṃ sādhugāthāsadasi ripavo'pi surā nṛpa|
pratimānaṃ prakurvanti kimutānye bhavādṛśāḥ|| 35
अर्थ
युधिष्ठिर! यों तो देवता उनके शत्रु हैं; परन्तु फिर भी भक्तोंका चरित्र सुननेके लिये जब उन लोगोंकी सभा होती है, तब वे दूसरे भक्तोंको प्रह्लादके समान कहकर उनका सम्मान करते हैं। फिर आप-जैसे अजातशत्रु भगवद्भक्त उनका आदर करेंगे, इसमें तो सन्देह ही क्या है॥ ३५॥