श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.4.27

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

यदा देवेषु वेदेषु गोषु विप्रेषु साधुषु।

धर्मे मयि च विद्वेषः स वा आशु विनश्यति॥ २७

yadā deveṣu vedeṣu goṣu vipreṣu sādhuṣu|

dharme mayi ca vidveṣaḥ sa vā āśu vinaśyati|| 27

अर्थ

कोई भी प्राणी जब देवता, वेद, गाय, ब्राह्मण, साधु, धर्म और मुझसे द्वेष करने लगता है, तब शीघ्र ही उसका विनाश हो जाता है॥ २७॥

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