श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.4.15

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

स एव वर्णाश्रमिभिः क्रतुभिर्भूरिदक्षिणैः।

इज्यमानो हविर्भागानग्रहीत् स्वेन तेजसा॥ १५

sa eva varṇāśramibhiḥ kratubhirbhūridakṣiṇaiḥ|

ijyamāno havirbhāgānagrahīt svena tejasā|| 15

अर्थ

युधिष्ठिर! वह इतना तेजस्वी था कि वर्णाश्रमधर्मका पालन करनेवाले पुरुष जो बड़ी-बड़ी दक्षिणावाले यज्ञ करते, उनके यज्ञोंकी आहुति वह स्वयं छीन लेता॥ १५॥

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