श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.3.5

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

चुक्षुभुर्नद्युदन्वन्तः सद्वीपाद्रिश्‍चचाल भूः।

निपेतुः सग्रहास्तारा जज्वलुश्‍च दिशो दश॥ ५

cukṣubhurnadyudanvantaḥ sadvīpādriścacāla bhūḥ|

nipetuḥ sagrahāstārā jajvaluśca diśo daśa|| 5

अर्थ

उसकी लपटसे नदी और समुद्र खौलने लगे। द्वीप और पर्वतोंके सहित पृथ्वी डगमगाने लगी। ग्रह और तारे टूट-टूटकर गिरने लगे तथा दसों दिशाओंमें मानो आग लग गयी॥ ५॥

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