उसकी लपटसे नदी और समुद्र खौलने लगे। द्वीप और पर्वतोंके सहित पृथ्वी डगमगाने लगी। ग्रह और तारे टूट-टूटकर गिरने लगे तथा दसों दिशाओंमें मानो आग लग गयी॥ ५॥
चुक्षुभुर्नद्युदन्वन्तः सद्वीपाद्रिश्चचाल भूः।
निपेतुः सग्रहास्तारा जज्वलुश्च दिशो दश॥ ५
उसकी लपटसे नदी और समुद्र खौलने लगे। द्वीप और पर्वतोंके सहित पृथ्वी डगमगाने लगी। ग्रह और तारे टूट-टूटकर गिरने लगे तथा दसों दिशाओंमें मानो आग लग गयी॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.3.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 819) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/3/5/