श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.2.59

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

यम एतदुपाख्याय तत्रैवान्तरधीयत।

ज्ञातयोऽपि सुयज्ञस्य चक्रुर्यत्साम्परायिकम्॥ ५९

yama etadupākhyāya tatraivāntaradhīyata|

jñātayo'pi suyajñasya cakruryatsāmparāyikam|| 59

अर्थ

यमराज यह उपाख्यान सुनाकर वहीं अन्तर्धान हो गये। भाई-बन्धुओंने भी सुयज्ञकी अन्त्येष्टि-क्रिया की॥ ५९॥

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