श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.2.17

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

हिरण्यकशिपुर्भ्रातुः सम्परेतस्य दुःखितः।

कृत्वा कटोदकादीनि भ्रातृपुत्रानसान्त्वयत्॥ १७

hiraṇyakaśipurbhrātuḥ samparetasya duḥkhitaḥ|

kṛtvā kaṭodakādīni bhrātṛputrānasāntvayat|| 17

अर्थ

युधिष्ठिर! भाईकी मृत्युसे हिरण्यकशिपुको बड़ा दुःख हुआ था। जब उसने उसकी अन्त्येष्टि क्रियासे छुट्टी पा ली, तब शकुनि, शम्बर, धृष्ट, भूतसन्तापन, वृक, कालनाभ, महानाभ, हरिश्मश्रु और उत्कच अपने इन भतीजोंको सान्त्वना दी॥ १७-१८॥

यह अर्थ श्लोक 17–18 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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