परीक्षित्! इस प्रकार मैंने तुम्हें दक्षपुत्रियोंके वंशोंका अलग-अलग वर्णन सुनाया। उन्हींके वंशमें देवता, असुर, मनुष्य आदि और सम्पूर्ण चराचरकी सृष्टि हुई है॥ ८०॥
इति दाक्षायणीनां ते पृथग्वंशाः प्रकीर्तिताः।
देवासुरमनुष्याद्या लोका यत्र चराचराः॥ ८०
परीक्षित्! इस प्रकार मैंने तुम्हें दक्षपुत्रियोंके वंशोंका अलग-अलग वर्णन सुनाया। उन्हींके वंशमें देवता, असुर, मनुष्य आदि और सम्पूर्ण चराचरकी सृष्टि हुई है॥ ८०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.15.80 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 904) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/15/80/