श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.15.75

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

यूयं नृलोके बत भूरिभागा

लोकं पुनाना मुनयोऽभियन्ति।

येषां गृहानावसतीति साक्षाद्

गूढं परं ब्रह्म मनुष्यलिङ्गम्॥ ७५

yūyaṃ nṛloke bata bhūribhāgā

lokaṃ punānā munayo'bhiyanti|

yeṣāṃ gṛhānāvasatīti sākṣād

gūḍhaṃ paraṃ brahma manuṣyaliṅgam|| 75

अर्थ

युधिष्ठिर! इस मनुष्यलोकमें तुमलोगोंके भाग्य अत्यन्त प्रशंसनीय हैं; क्योंकि तुम्हारे घरमें साक्षात् परब्रह्म परमात्मा मनुष्यका रूप धारण करके गुप्तरूपसे निवास करते हैं। इसीसे सारे संसारको पवित्र कर देनेवाले ऋषि-मुनि बार-बार उनका दर्शन करनेके लिये चारों ओरसे तुम्हारे पास आया करते हैं॥ ७५॥✎ 1956

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