उनके शापसे मैं दासीका पुत्र हुआ। किन्तु उस शूद्र-जीवनमें किये हुए महात्माओंके सत्संग और सेवा-शुश्रूषाके प्रभावसे मैं दूसरे जन्ममें ब्रह्माजीका पुत्र हुआ॥ ७३॥✎ 647648
तावद्दास्यामहं जज्ञे तत्रापि ब्रह्मवादिनाम्।
शुश्रूषयानुषङ्गेण प्राप्तोऽहं ब्रह्मपुत्रताम्॥ ७३
उनके शापसे मैं दासीका पुत्र हुआ। किन्तु उस शूद्र-जीवनमें किये हुए महात्माओंके सत्संग और सेवा-शुश्रूषाके प्रभावसे मैं दूसरे जन्ममें ब्रह्माजीका पुत्र हुआ॥ ७३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.15.73 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 903) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/15/73/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)