॥ श्रीहरिः ॥
देशे शुचौ समे राजन्संस्थाप्यासनमात्मनः।
स्थिरं समं सुखं तस्मिन्नासीतर्ज्वङ्ग ओमिति॥ ३१
deśe śucau same rājansaṃsthāpyāsanamātmanaḥ|
sthiraṃ samaṃ sukhaṃ tasminnāsītarjvaṅga omiti|| 31
अर्थ
युधिष्ठिर! पवित्र और समान भूमिपर अपना आसन बिछाये और सीधे स्थिर-भावसे समान और सुखकर आसनसे उसपर बैठकर ॐ कारका जप करे॥ ३१॥
देशे शुचौ समे राजन्संस्थाप्यासनमात्मनः।
स्थिरं समं सुखं तस्मिन्नासीतर्ज्वङ्ग ओमिति॥ ३१
युधिष्ठिर! पवित्र और समान भूमिपर अपना आसन बिछाये और सीधे स्थिर-भावसे समान और सुखकर आसनसे उसपर बैठकर ॐ कारका जप करे॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.15.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 897) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/15/31/