श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.14.36

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

जीवराशिभिराकीर्ण आण्डकोशाङ्‌घ्रिपो महान्।

तन्मूलत्वादच्युतेज्या सर्वजीवात्मतर्पणम्॥ ३६

jīvarāśibhirākīrṇa āṇḍakośāṅghripo mahān|

tanmūlatvādacyutejyā sarvajīvātmatarpaṇam|| 36

अर्थ

असंख्य जीवोंसे भरपूर इस ब्रह्माण्डरूप महावृक्षके एकमात्र मूल भगवान् श्रीकृष्ण ही हैं। इसलिये उनकी पूजासे समस्त जीवोंकी आत्मा तृप्त हो जाती है॥ ३६॥

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