श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.14.27

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

अथ देशान्प्रवक्ष्यामि धर्मादिश्रेयआवहान्।

स वै पुण्यतमो देशः सत्पात्रं यत्र लभ्यते॥ २७

atha deśānpravakṣyāmi dharmādiśreyaāvahān|

sa vai puṇyatamo deśaḥ satpātraṃ yatra labhyate|| 27

अर्थ

युधिष्ठिर! अब मैं उन स्थानोंका वर्णन करता हूँ, जो धर्म आदि श्रेयकी प्राप्ति करानेवाले हैं। सबसे पवित्र देश वह है, जिसमें सत्पात्र मिलते हों॥ २७॥

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