sambhāvanīyo hi bhavānātmanaḥ śuddhimicchatām|| 22
अर्थ
तो भी प्रह्लाद! मैंने जैसा कुछ जाना है, उसके अनुसार मैं तुम्हारे प्रश्नोंका उत्तर देता हूँ। क्योंकि आत्मशुद्धिके अभिलाषियोंको तुम्हारा सम्मान अवश्य करना चाहिये॥ २२॥
अथापि ब्रूमहे प्रश्नांस्तव राजन्यथाश्रुतम्।
सम्भावनीयो हि भवानात्मनः शुद्धिमिच्छताम्॥ २२
तो भी प्रह्लाद! मैंने जैसा कुछ जाना है, उसके अनुसार मैं तुम्हारे प्रश्नोंका उत्तर देता हूँ। क्योंकि आत्मशुद्धिके अभिलाषियोंको तुम्हारा सम्मान अवश्य करना चाहिये॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.13.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 886) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/13/22/