अब मैं ऋषियोंके मतानुसार वानप्रस्थ-आश्रमके नियम बतलाता हूँ। इनका आचरण करनेसे वानप्रस्थ-आश्रमीको अनायास ही ऋषियोंके लोक महर्लोककी प्राप्ति हो जाती है॥ १७॥
वानप्रस्थस्य वक्ष्यामि नियमान्मुनिसम्मतान्।
यानातिष्ठन् मुनिर्गच्छेदृषिलोकमिहाञ्जसा॥ १७
अब मैं ऋषियोंके मतानुसार वानप्रस्थ-आश्रमके नियम बतलाता हूँ। इनका आचरण करनेसे वानप्रस्थ-आश्रमीको अनायास ही ऋषियोंके लोक महर्लोककी प्राप्ति हो जाती है॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.12.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 881) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/12/17/