श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.11.21

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

शमो दमस्तपः शौचं संतोषः क्षान्तिरार्जवम्।

ज्ञानं दयाच्युतात्मत्वं सत्यं च ब्रह्मलक्षणम्॥ २१

śamo damastapaḥ śaucaṃ saṃtoṣaḥ kṣāntirārjavam|

jñānaṃ dayācyutātmatvaṃ satyaṃ ca brahmalakṣaṇam|| 21

अर्थ

शम, दम, तप, शौच, सन्तोष, क्षमा, सरलता, ज्ञान, दया, भगवत्परायणता और सत्य—ये ब्राह्मणके लक्षण हैं॥ २१॥

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