युधिष्ठिर! तुमने मुझसे पूछा था कि भगवान्से द्वेष करनेवाले शिशुपाल आदिको उनके सारूप्यकी प्राप्ति कैसे हुई। उसका उत्तर मैंने तुम्हें दे दिया॥ ४१॥✎ 631
आख्यातं सर्वमेतत् ते यन्मां त्वं परिपृष्टवान्।
दमघोषसुतादीनां हरेः सात्म्यमपि द्विषाम्॥ ४१
युधिष्ठिर! तुमने मुझसे पूछा था कि भगवान्से द्वेष करनेवाले शिशुपाल आदिको उनके सारूप्यकी प्राप्ति कैसे हुई। उसका उत्तर मैंने तुम्हें दे दिया॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 871) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/10/41/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)