यद्यपि मेरे अंगोंका स्पर्श होनेसे तुम्हारे पिता पूर्णरूपसे पवित्र हो गये हैं, तथापि तुम उनकी अन्त्येष्टि-क्रिया करो। तुम्हारे-जैसी सन्तानके कारण उन्हें उत्तम लोकोंकी प्राप्ति होगी॥ २२॥✎ 6262024
कुरु त्वं प्रेतकार्याणि पितुः पूतस्य सर्वशः।
मदङ्गस्पर्शनेनाङ्ग लोकान्यास्यति सुप्रजाः॥ २२
यद्यपि मेरे अंगोंका स्पर्श होनेसे तुम्हारे पिता पूर्णरूपसे पवित्र हो गये हैं, तथापि तुम उनकी अन्त्येष्टि-क्रिया करो। तुम्हारे-जैसी सन्तानके कारण उन्हें उत्तम लोकोंकी प्राप्ति होगी॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 869) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/10/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#626 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीनृसिंहभगवान् ने → श्रीनृसिंहभगवान्ने