इस परम पुण्यमय प्रसंगको नारदादि महात्मागण बड़े प्रेमसे गाते रहते हैं। अब मैं अपने पिता श्रीकृष्ण-द्वैपायन मुनिको नमस्कार करके भगवान्की लीला-कथाका वर्णन करता हूँ॥ ५॥✎ 562563
गीयते परमं पुण्यमृषिभिर्नारदादिभिः।
नत्वा कृष्णाय मुनये कथयिष्ये हरेः कथाम्॥ ५
इस परम पुण्यमय प्रसंगको नारदादि महात्मागण बड़े प्रेमसे गाते रहते हैं। अब मैं अपने पिता श्रीकृष्ण-द्वैपायन मुनिको नमस्कार करके भगवान्की लीला-कथाका वर्णन करता हूँ॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.1.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 805) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/1/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)