उस समय भी भगवान्ने उन्हें शापसे छुड़ानेके लिये रामरूपसे उनका वध किया। युधिष्ठिर! मार्कण्डेय मुनिके मुखसे तुम भगवान् श्रीरामका चरित्र सुनोगे॥ ४४॥✎ 578
तत्रापि राघवो भूत्वा न्यहनच्छापमुक्तये।
रामवीर्यं श्रोष्यसि त्वं मार्कण्डेयमुखात् प्रभो॥ ४४
उस समय भी भगवान्ने उन्हें शापसे छुड़ानेके लिये रामरूपसे उनका वध किया। युधिष्ठिर! मार्कण्डेय मुनिके मुखसे तुम भगवान् श्रीरामका चरित्र सुनोगे॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.1.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 810) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/1/44/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)