श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.14

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तत्रासीनं सुरऋषिं राजा पाण्डुसुतः क्रतौ।

पप्रच्छ विस्मितमना मुनीनां शृण्वतामिदम्॥ १४

tatrāsīnaṃ suraṛṣiṃ rājā pāṇḍusutaḥ kratau|

papraccha vismitamanā munīnāṃ śṛṇvatāmidam|| 14

अर्थ

वहीं देवर्षि नारद भी बैठे हुए थे। इस घटनासे आश्‍चर्यचकित होकर राजा युधिष्ठिरने बड़े-बड़े मुनियोंसे भरी हुई सभामें; उस यज्ञमण्डपमें ही देवर्षि नारदसे यह प्रश्न किया॥ १४॥

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