॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.9.32
यत् ते गतीनां तिसॄणामीशितुः परमं पदम्।✎ 1087
नार्वाचीनो विसर्गस्य धातर्वेदितुमर्हति॥ ३२
yat te gatīnāṃ tisṝṇāmīśituḥ paramaṃ padam|
nārvācīno visargasya dhātarveditumarhati|| 32
अर्थ
विधातः! सत्त्व, रज, तम—इन तीन गुणोंके अनुसार जो उत्तम, मध्यम और निकृष्ट गतियाँ प्राप्त होती हैं, उनके नियामक आप ही हैं। आपके परमपदका वास्तविक स्वरूप इस कार्यरूप जगत्का कोई आधुनिक प्राणी नहीं जान सकता॥ ३२॥