श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.9.24

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

पुरा स्वयम्भूरपि संयमाम्भ-

स्युदीर्णवातोर्मिरवैः कराले।

एकोऽरविन्दात् पतितस्ततार

तस्माद् भयाद् येन स नोऽस्तु पारः॥ २४

purā svayambhūrapi saṃyamāmbha-

syudīrṇavātormiravaiḥ karāle|

eko'ravindāt patitastatāra

tasmād bhayād yena sa no'stu pāraḥ|| 24

अर्थ

प्राचीन कालमें प्रचण्ड पवनके थपेड़ोंसे उठी हुई उत्ताल तरंगोंकी गर्जनाके कारण ब्रह्माजी भगवान्‌के नाभिकमलसे अत्यन्त भयानक प्रलयकालीन जलमें गिर पड़े थे। यद्यपि वे असहाय थे, तथापि जिनकी कृपासे वे उस विपत्तिसे बच सके, वे ही भगवान् हमें इस संकटसे पार करें॥ २४॥✎ 519 520

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #519 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से
  • #520 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें