श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.8.31

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

यथा हि भगवानेव वस्तुतः सदसच्च यत्।

सत्येनानेन नः सर्वे यान्तु नाशमुपद्रवाः॥ ३१

yathā hi bhagavāneva vastutaḥ sadasacca yat|

satyenānena naḥ sarve yāntu nāśamupadravāḥ|| 31

अर्थ

‘जितना भी कार्य अथवा कारणरूप जगत् है, वह वास्तवमें भगवान् ही हैं’—इस सत्यके प्रभावसे हमारे सारे उपद्रव नष्ट हो जायँ॥ ३१॥

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