श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.8.3

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

वृतः पुरोहितस्त्वाष्ट्रो महेन्द्रायानुपृच्छते।

नारायणाख्यं वर्माह तदिहैकमनाः शृणु॥ ३

vṛtaḥ purohitastvāṣṭro mahendrāyānupṛcchate|

nārāyaṇākhyaṃ varmāha tadihaikamanāḥ śṛṇu|| 3

अर्थ

श्रीशुकदेवजीने कहा—परीक्षित्! जब देवताओंने विश्‍वरूपको पुरोहित बना लिया, तब देवराज इन्द्रके प्रश्न करनेपर विश्‍वरूपने उन्हें नारायणकवचका उपदेश किया। तुम एकाग्रचित्तसे उसका श्रवण करो॥ ३॥

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