॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.8.21
देवोऽपराह्णे मधुहोग्रधन्वा
सायं त्रिधामावतु माधवो माम्।
दोषे हृषीकेश उतार्धरात्रे
निशीथ एकोऽवतु पद्मनाभः॥ २१
devo'parāhṇe madhuhogradhanvā
sāyaṃ tridhāmāvatu mādhavo mām|
doṣe hṛṣīkeśa utārdharātre
niśītha eko'vatu padmanābhaḥ|| 21
अर्थ
तीसरे पहरमें भगवान् मधुसूदन अपना प्रचण्ड धनुष लेकर मेरी रक्षा करें। सायंकालमें ब्रह्मा आदि त्रिमूर्तिधारी माधव, सूर्यास्तके बाद हृषीकेश, अर्धरात्रिके पूर्व तथा अर्धरात्रिके समय अकेले भगवान् पद्मनाभ मेरी रक्षा करें॥ २१॥