श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.7.37

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

तथापि न प्रतिब्रूयां गुरुभिः प्रार्थितं कियत्।

भवतां प्रार्थितं सर्वं प्राणैरर्थैश्‍च साधये॥ ३७

tathāpi na pratibrūyāṃ gurubhiḥ prārthitaṃ kiyat|

bhavatāṃ prārthitaṃ sarvaṃ prāṇairarthaiśca sādhaye|| 37

अर्थ

जो काम आपलोग मुझसे कराना चाहते हैं वह निन्दनीय है—फिर भी मैं आपके कामसे मुँह नहीं मोड़ सकता; क्योंकि आपलोगोंकी माँग ही कितनी है। इसलिये आपलोगोंका मनोरथ मैं तन-मन-धनसे पूरा करूँगा॥ ३७॥

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