उन्होंने देवताओंपर इतने तीखे-तीखे बाणोंकी वर्षा की कि उनके मस्तक, जंघा, बाहु आदि अंग कट-कटकर गिरने लगे। तब इन्द्रके साथ सभी देवता सिर झुकाकर ब्रह्माजीकी शरणमें गये॥ १९॥
तैर्विसृष्टेषुभिस्तीक्ष्णैर्निर्भिन्नाङ्गोरुबाहवः।
ब्रह्माणं शरणं जग्मुः सहेन्द्रा नतकन्धराः॥ १९
उन्होंने देवताओंपर इतने तीखे-तीखे बाणोंकी वर्षा की कि उनके मस्तक, जंघा, बाहु आदि अंग कट-कटकर गिरने लगे। तब इन्द्रके साथ सभी देवता सिर झुकाकर ब्रह्माजीकी शरणमें गये॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.7.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 735) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/7/19/