दक्षप्रजापतिने देखा कि आजकल बहुत-से अशकुन हो रहे हैं। उनके चित्तमें पुत्रोंके अनिष्टकी आशंका हो आयी। इतनेमें ही उन्हें मालूम हुआ कि पहलेकी भाँति अबकी बार भी नारदजीने मेरे पुत्रोंको चौपट कर दिया ॥ ३४॥
एतस्मिन् काल उत्पातान् बहून् पश्यन् प्रजापतिः।
पूर्ववन्नारदकृतं पुत्रनाशमुपाशृणोत्॥ ३४
दक्षप्रजापतिने देखा कि आजकल बहुत-से अशकुन हो रहे हैं। उनके चित्तमें पुत्रोंके अनिष्टकी आशंका हो आयी। इतनेमें ही उन्हें मालूम हुआ कि पहलेकी भाँति अबकी बार भी नारदजीने मेरे पुत्रोंको चौपट कर दिया ॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.5.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 728) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/5/34/