जो धर्मज्ञ भाई अपने बड़े भाइयोंके श्रेष्ठ मार्गका अनुसरण करता है, वही सच्चा भाई है! वह पुण्यवान् पुरुष परलोकमें मरुद्गणोंके साथ आनन्द भोगता है॥ ३१॥
भ्रातॄणां प्रायणं भ्राता योऽनुतिष्ठति धर्मवित्।
स पुण्यबन्धुः पुरुषो मरुद्भिः सह मोदते॥ ३१
जो धर्मज्ञ भाई अपने बड़े भाइयोंके श्रेष्ठ मार्गका अनुसरण करता है, वही सच्चा भाई है! वह पुण्यवान् पुरुष परलोकमें मरुद्गणोंके साथ आनन्द भोगता है॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.5.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 728) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/5/31/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1076 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भ्रातृणां → भ्रातॄणां