श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.5.24

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

स१ भूयः पाञ्चजन्यायामजेन परिसान्त्वितः।

पुत्रानजनयद् दक्षः शबलाश्वान् सहस्रशः॥ २४

sa bhūyaḥ pāñcajanyāyāmajena parisāntvitaḥ|

putrānajanayad dakṣaḥ śabalāśvān sahasraśaḥ|| 24

अर्थ

ब्रह्माजीने दक्षप्रजापतिको बड़ी सान्त्वना दी। तब उन्होंने पंचजन-नन्दिनी असिक्‍नीके गर्भसे एक हजार पुत्र और उत्पन्‍न किये। उनका नाम था शबलाश्‍व ॥ २४॥✎ 513

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—ततः स पाञ्च०।

    (मुद्रित पृष्ठ 727)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #513 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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