वहाँ एक अत्यन्त श्रेष्ठ तीर्थ है, उसका नाम है—अघमर्षण। वह सारे पापोंको धो बहाता है। प्रजापति दक्ष उस तीर्थमें त्रिकाल स्नान करते और तपस्याके द्वारा भगवान्की आराधना करते॥ २१॥✎ 509510
तत्राघमर्षणं नाम तीर्थं पापहरं परम्।
उपस्पृश्यानुसवनं तपसातोषयद्धरिम्॥ २१
वहाँ एक अत्यन्त श्रेष्ठ तीर्थ है, उसका नाम है—अघमर्षण। वह सारे पापोंको धो बहाता है। प्रजापति दक्ष उस तीर्थमें त्रिकाल स्नान करते और तपस्याके द्वारा भगवान्की आराधना करते॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.4.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 719) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/4/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)