श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.4.19

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

मनसैवासृजत्पूर्वं प्रजापतिरिमाः प्रजाः।

देवासुरमनुष्यादीन्‍नभःस्थलजलौकसः ॥ १९

manasaivāsṛjatpūrvaṃ prajāpatirimāḥ prajāḥ|

devāsuramanuṣyādīnnabhaḥsthalajalaukasaḥ || 19

अर्थ

परीक्षित्! पहले प्रजापति दक्षने जल, थल और आकाशमें रहनेवाले देवता, असुर एवं मनुष्य आदि प्रजाकी सृष्टि अपने संकल्पसे ही की॥ १९॥✎ 509 510

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #509 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #510 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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