श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.4.13

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

अन्तर्देहेषु भूतानामात्माऽऽस्ते३ हरिरीश्‍वरः।

सर्वं तद्धिष्ण्यमीक्षध्वमेवं वस्तोषितो ह्यसौ॥ १३

antardeheṣu bhūtānāmātmā''ste harirīśvaraḥ|

sarvaṃ taddhiṣṇyamīkṣadhvamevaṃ vastoṣito hyasau|| 13

अर्थ

प्रचेताओ! समस्त प्राणियोंके हृदयमें सर्वशक्तिमान् भगवान् आत्माके रूपमें विराजमान हैं। इसलिये आपलोग सभीको भगवान्का निवासस्थान समझें। यदि आप ऐसा करेंगे तो भगवान्‌को प्रसन्‍न कर लेंगे॥ १३॥✎ 507 508

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—भूतानां शास्तास्ते।

    (मुद्रित पृष्ठ 718)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #507 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #508 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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