॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.4.1
देवासुरनृणां सर्गो नागानां मृगपक्षिणाम्।
सामासिकस्त्वया प्रोक्तो यस्तु स्वायम्भुवेऽन्तरे॥ १
devāsuranṛṇāṃ sargo nāgānāṃ mṛgapakṣiṇām|
sāmāsikastvayā prokto yastu svāyambhuve'ntare|| 1
अर्थ
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! आपने संक्षेपसे (तीसरे स्कन्धमें) इस बातका वर्णन किया कि स्वायम्भुव मन्वन्तरमें देवता, असुर, मनुष्य, सर्प और पशु-पक्षी आदिकी सृष्टि कैसे हुई॥ १॥