इतिहासमिमं गुह्यं भगवान् कुम्भसम्भवः।
कथयामास मलय आसीनो हरिमर्चयन्॥ ३५
प्रिय परीक्षित्! यह इतिहास परम गोपनीय—अत्यन्त रहस्यमय है। मलयपर्वतपर विराजमान भगवान् अगस्त्यजीने श्रीहरिकी पूजा करते समय मुझे यह सुनाया था॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.3.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 716) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/3/35/