श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.3.29

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

जिह्वा न वक्ति भगवद‍्गुणनामधेयं

चेतश्‍च न स्मरति तच्चरणारविन्दम्।

कृष्णाय नो नमति यच्छिर एकदापि

तानानयध्वमसतोऽकृतविष्णुकृत्यान्॥ २९

jihvā na vakti bhagavadguṇanāmadheyaṃ

cetaśca na smarati taccaraṇāravindam|

kṛṣṇāya no namati yacchira ekadāpi

tānānayadhvamasato'kṛtaviṣṇukṛtyān|| 29

अर्थ

जिनकी जीभ भगवान्‌के गुणों और नामोंका उच्चारण नहीं करती, जिनका चित्त उनके चरणारविन्दोंका चिन्तन नहीं करता और जिनका सिर एक बार भी भगवान् श्रीकृष्णके चरणोंमें नहीं झुकता, उन भगवत्सेवा-विमुख पापियोंको ही मेरे पास लाया करो॥ २९॥

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