श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.3.1

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

अथ तृतीयोऽध्यायः

यम और यमदूतोंका संवाद

राजोवाच

निशम्य देवः स्वभटोपवर्णितं

प्रत्याह किं तान् प्रति धर्मराजः।

एवं हताज्ञो विहतान्मुरारे-

र्नैदेशिकैर्यस्य वशे जनोऽयम्॥ १

niśamya devaḥ svabhaṭopavarṇitaṃ

pratyāha kiṃ tān prati dharmarājaḥ|

evaṃ hatājño vihatānmurāre-

rnaideśikairyasya vaśe jano'yam|| 1

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—भगवन्! देवाधिदेव धर्मराजके वशमें सारे जीव हैं और भगवान्‌के पार्षदोंने उन्हींकी आज्ञा भंग कर दी तथा उनके दूतोंको अपमानित कर दिया। जब उनके दूतोंने यमपुरीमें जाकर उनसे अजामिलका वृत्तान्त कह सुनाया, तब सब कुछ सुनकर उन्होंने अपने दूतोंसे क्या कहा?॥ १॥

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