श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.49

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

म्रियमाणो हरेर्नाम गृणन् पुत्रोपचारितम्।

अजामिलोऽप्यगाद्धाम किं पुनः श्रद्धया गृणन्॥ ४९

mriyamāṇo harernāma gṛṇan putropacāritam|

ajāmilo'pyagāddhāma kiṃ punaḥ śraddhayā gṛṇan|| 49

अर्थ

परीक्षित्! देखो—अजामिल-जैसे पापीने मृत्युके समय पुत्रके बहाने भगवान्‌के नामका उच्चारण किया! उसे भी वैकुण्ठकी प्राप्ति हो गयी! फिर जो लोग श्रद्धाके साथ भगवन्‍नामका उच्चारण करते हैं, उनकी तो बात ही क्या है॥ ४९॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां षष्ठस्कन्धेऽजामिलोपाख्याने द्वितीयोऽध्यायः॥ २॥

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