॥ श्रीहरिः ॥
साकं विहायसा विप्रो महापुरुषकिङ्करैः।
हैमं विमानमारुह्य ययौ यत्र श्रियः पतिः॥ ४४
sākaṃ vihāyasā vipro mahāpuruṣakiṅkaraiḥ|
haimaṃ vimānamāruhya yayau yatra śriyaḥ patiḥ|| 44
अर्थ
अजामिल भगवान्के पार्षदोंके साथ स्वर्णमय विमानपर आरूढ़ होकर आकाशमार्गसे भगवान् लक्ष्मीपतिके निवासस्थान वैकुण्ठको चले गये॥ ४४॥
साकं विहायसा विप्रो महापुरुषकिङ्करैः।
हैमं विमानमारुह्य ययौ यत्र श्रियः पतिः॥ ४४
अजामिल भगवान्के पार्षदोंके साथ स्वर्णमय विमानपर आरूढ़ होकर आकाशमार्गसे भगवान् लक्ष्मीपतिके निवासस्थान वैकुण्ठको चले गये॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 711) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/2/44/