श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.44

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

साकं विहायसा विप्रो महापुरुषकिङ्करैः।

हैमं विमानमारुह्य ययौ यत्र श्रियः पतिः॥ ४४

sākaṃ vihāyasā vipro mahāpuruṣakiṅkaraiḥ|

haimaṃ vimānamāruhya yayau yatra śriyaḥ patiḥ|| 44

अर्थ

अजामिल भगवान्‌के पार्षदोंके साथ स्वर्णमय विमानपर आरूढ़ होकर आकाशमार्गसे भगवान् लक्ष्मीपतिके निवासस्थान वैकुण्ठको चले गये॥ ४४॥

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