श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.41

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

ततो गुणेभ्य आत्मानं वियुज्यात्मसमाधिना।

युयुजे भगवद्धाम्नि ब्रह्मण्यनुभवात्मनि॥ ४१

tato guṇebhya ātmānaṃ viyujyātmasamādhinā|

yuyuje bhagavaddhāmni brahmaṇyanubhavātmani|| 41

अर्थ

इसके बाद आत्मचिन्तनके द्वारा उन्होंने बुद्धिको विषयोंसे पृथक् कर लिया तथा भगवान्‌के धाम अनुभवस्वरूप परब्रह्ममें जोड़ दिया॥ ४१॥

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