श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.40

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

स तस्मिन् देवसदन आसीनो योगमाश्रितः।

प्रत्याहृतेन्द्रियग्रामो युयोज मन आत्मनि॥ ४०

sa tasmin devasadana āsīno yogamāśritaḥ|

pratyāhṛtendriyagrāmo yuyoja mana ātmani|| 40

अर्थ

उस देवस्थानमें जाकर वे भगवान्‌के मन्दिरमें आसनसे बैठ गये और उन्होंने योगमार्गका आश्रय लेकर अपनी सारी इन्द्रियोंको विषयोंसे हटाकर मनमें लीन कर लिया और मनको बुद्धिमें मिला दिया॥ ४०॥

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