अभी-अभी वे मुझे अपने फंदोंमें फँसाकर पृथ्वीके नीचे ले जा रहे थे, परन्तु चार अत्यन्त सुन्दर सिद्धोंने आकर मुझे छुड़ा लिया! वे अब कहाँ चले गये॥ ३१॥
अथ ते क्व गताः सिद्धाश्चत्वारश्चारुदर्शनाः।
व्यमोचयन्नीयमानं बद्ध्वा पाशैरधो भुवः॥ ३१
अभी-अभी वे मुझे अपने फंदोंमें फँसाकर पृथ्वीके नीचे ले जा रहे थे, परन्तु चार अत्यन्त सुन्दर सिद्धोंने आकर मुझे छुड़ा लिया! वे अब कहाँ चले गये॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 709) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/2/31/