श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.31

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अथ ते क्‍व गताः सिद्धाश्‍चत्वारश्चारुदर्शनाः।

व्यमोचयन्‍नीयमानं बद‍्ध्वा पाशैरधो भुवः॥ ३१

atha te kva gatāḥ siddhāścatvāraścārudarśanāḥ|

vyamocayannīyamānaṃ baddhvā pāśairadho bhuvaḥ|| 31

अर्थ

अभी-अभी वे मुझे अपने फंदोंमें फँसाकर पृथ्वीके नीचे ले जा रहे थे, परन्तु चार अत्यन्त सुन्दर सिद्धोंने आकर मुझे छुड़ा लिया! वे अब कहाँ चले गये॥ ३१॥

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