kva yātā adya te ye māṃ vyakarṣan pāśapāṇayaḥ|| 30
अर्थ
‘मैंने अभी जो अद्भुत दृश्य देखा, क्या यह स्वप्न है? अथवा जाग्रत् अवस्थाका ही प्रत्यक्ष अनुभव है? अभी-अभी जो हाथोंमें फंदा लेकर मुझे खींच रहे थे, वे कहाँ चले गये?॥ ३०॥
किमिदं स्वप्न आहोस्वित् साक्षाद् दृष्टमिहाद्भुतम्।
क्व याता अद्य ते ये मां व्यकर्षन् पाशपाणयः॥ ३०
‘मैंने अभी जो अद्भुत दृश्य देखा, क्या यह स्वप्न है? अथवा जाग्रत् अवस्थाका ही प्रत्यक्ष अनुभव है? अभी-अभी जो हाथोंमें फंदा लेकर मुझे खींच रहे थे, वे कहाँ चले गये?॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 709) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/2/30/