श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.3

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

प्रजानां पितरो ये च शास्तारः साधवः समाः।

यदि स्यात्तेषु वैषम्यं कं यान्ति शरणं प्रजाः॥ ३

prajānāṃ pitaro ye ca śāstāraḥ sādhavaḥ samāḥ|

yadi syātteṣu vaiṣamyaṃ kaṃ yānti śaraṇaṃ prajāḥ|| 3

अर्थ

जो प्रजाके रक्षक हैं, शासक हैं, समदर्शी और परोपकारी हैं—यदि वे ही प्रजाके प्रति विषमताका व्यवहार करने लगें तो फिर प्रजा किसकी शरण लेगी?॥ ३॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें